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नीट परीक्षा रिकॉर्ड संरक्षण नियम पर सवाल, समय सीमा समाप्त होने के करीब

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नयी दिल्ली — राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के परीक्षा रिकॉर्ड को नष्ट करने से जुड़े 90 दिवसीय ‘बचत और निस्तारण’ (वीडिंग आउट) नियम पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह विवाद गुजरात की एक नीट (यूजी) उम्मीदवार द्वारा अपनी ओएमआर उत्तर पुस्तिका की प्रामाणिकता को चुनौती दिए जाने और परिणामों के बाद रिकॉर्ड संरक्षण की समयसीमा समाप्त होने के करीब पहुंचने के कारण उत्पन्न हुआ है।

एनटीए के सूचना बुलेटिन के अनुसार, परीक्षा से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड परिणाम घोषित होने की तिथि से 90 दिनों तक ही सुरक्षित रखे जाते हैं, जिसके बाद उन्हें नष्ट कर दिया जाता है। इस अवधि के समाप्त होने के बाद एजेंसी इन मामलों पर कोई पत्राचार नहीं करती है। इस वर्ष नीट (यूजी) की पुनर्रपरीक्षा 21 जून को आयोजित की गई थी, जिसके परिणाम 16 जुलाई को घोषित किए गए थे। इसके चलते 90 दिन की यह समयसीमा अब पूरी होने की कगार पर है।

यह मामला केवल एक उम्मीदवार के अंकों या उत्तर पुस्तिकाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में यह बड़ा प्रशासनिक सवाल भी शामिल है कि जब अदालत में किसी मुख्य परीक्षा दस्तावेज की प्रामाणिकता पर विवाद चल रहा हो, तो रिकॉर्ड संरक्षण के नियम किस प्रकार लागू होने चाहिए।

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गुजरात की उम्मीदवार श्रेया चौधरी ने दावा किया है कि एनटीए द्वारा 16 जुलाई को घोषित परिणामों में उन्हें जितने अंक मिले हैं, वास्तव में उससे 415 अंक अधिक मिलने चाहिए थे। इस महीने की शुरुआत में गुजरात उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद अदालत की एक खंडपीठ ने 12 अक्टूबर को उनकी अपील भी खारिज कर दी। इसके बाद उम्मीदवार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की है।

विभिन्न परीक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी संख्या में ओएमआर शीट, उपस्थिति पत्रक और अन्य दस्तावेज उत्पन्न होने के कारण परीक्षा निकायों के लिए रिकॉर्ड को अनिश्चित काल तक सुरक्षित रखना संभव नहीं होता है, और एक निश्चित समयसीमा के तहत इन्हें निपटाने के नियम बनाए जाते हैं। हालांकि, केवल आरटीआई आवेदन, शिकायत दर्ज करने या अदालत में याचिका दाखिल करने मात्र से एनटीए अपने रिकॉर्ड नष्ट करने की प्रक्रिया स्वतः स्थगित नहीं करता है। अधिकारियों का कहना है कि यदि विवाद अनसुलझा है और मूल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण है, तो उम्मीदवारों को अदालत से एक स्पष्ट अंतरिम निर्देश प्राप्त करना चाहिए, जो एनटीए को मामले के अंतिम फैसले तक मूल ओएमआर शीट और संबंधित रिकॉर्ड को संरक्षित रखने का आदेश दे सके।

एक कानूनी विशेषज्ञ ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के निर्णय को रिकॉर्ड को नष्ट होने से रोकने वाला स्थगन आदेश नहीं माना जाना चाहिए, और इसके लिए अदालत का एक स्पष्ट निर्देश आवश्यक होता है।

एनटीए के अलावा अन्य प्रमुख परीक्षा निकाय भी रिकॉर्ड निस्तारण के अपने नियम रखते हैं। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के नियमों के तहत उत्तर पुस्तिकाएं सामान्यतः लिखित परीक्षा समाप्त होने के छह महीने या अंकतालिका प्रदर्शित होने के 45 दिन बाद तक रखी जाती हैं, जिसमें लंबित अदालती मामलों के लिए अलग प्रावधान हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) बिना किसी मुकदमे के तीन साल तक उत्तर पुस्तिकाएं सुरक्षित रखता है और मुकदमे की स्थिति में अंतिम फैसले के एक साल बाद तक इन्हें संरक्षित रखा जाता है, जबकि काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) के अनुसार परिणाम घोषित होने के 60 दिन बाद आईसीएसई उत्तर पुस्तिकाएं नहीं रखी जाती हैं। यूजीसी-नेट जून 2026 के सूचना बुलेटिन में भी परिणाम घोषणा से 90 दिनों तक रिकॉर्ड संरक्षित रखने का ऐसा ही प्रावधान था।

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