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भारत निर्वाचन आयोग के मतदाता पुनरीक्षण अभियान के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13.37 करोड़ नाम हटाए गए

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भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट चरण के दौरान 13.37 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में शुरू किए गए इस अभियान को लेकर कार्यप्रणाली और पद्धतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

विभिन्न चरणों के दौरान नाम हटाए जाने के आंकड़े काफी बड़े रहे हैं। इनमें बिहार में 65 लाख, दूसरे चरण में शामिल 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 6.57 करोड़ और तीसरे चरण में 6.15 करोड़ नाम सूची से हटाए गए। राज्यों के हिसाब से विलोपन दर बिहार में 8.3 फीसदी, दूसरे चरण में 12.9 फीसदी और तीसरे चरण में 17 फीसदी दर्ज की गई। वहीं, दिल्ली में यह दर 32.8 फीसदी और तेलंगाना में 21.7 फीसदी तक पहुंच गई।

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राजधानी दिल्ली में पुनरीक्षण के बाद तैयार ड्राफ्ट रोल में कुल मतदाताओं की संख्या केवल 97.54 लाख रह गई है। स्थिति यह है कि दिल्ली की 70 में से 24 विधानसभा सीटों पर ड्राफ्ट रोल में दर्ज मतदाताओं की संख्या फरवरी 2025 के विधानसभा चुनाव में मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या से भी कम है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन लोगों के नाम सूची से छूट गए हैं, उनके नामांकन के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाए।

पश्चिम बंगाल में तार्किक विसंगतियों के आधार पर 60 लाख नामों को चिह्नित किया गया था, जिनमें से सुप्रीम कोर्ट द्वारा तैनात न्यायिक अधिकारियों ने 27 लाख नाम सूची से हटा दिए। इसके खिलाफ दाखिल अपीलों में से अपीलीय न्यायाधिकरणों ने 93 प्रतिशत मामलों में मतदाताओं के नाम बहाल किए, जिससे लगभग एक लाख नाम सूची में वापस आ गए। हालांकि, सितंबर की शुरुआत तक 38 लाख से अधिक अपीलों में से केवल 1.22 लाख अपीलें ही निपटाई जा सकी थीं।

कोलकाता स्थित साबर इंस्टीट्यूट के सांख्यिकीय विश्लेषण के अनुसार, पश्चिम बंगाल में तार्किक विसंगतियों के लिए न्यायनिर्णय के बाद हटाए गए लोगों में से 65 प्रतिशत मुस्लिम थे। निर्वाचन आयोग के भीतर भी प्रक्रिया को लेकर मतभेद दिखे हैं। निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज कराईं।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को अपने फैसले में एसआईआर को बरकरार रखा था। अदालत वर्तमान में पश्चिम बंगाल और दिल्ली से संबंधित याचिकाओं के साथ-साथ आयोग के आचरण को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। देश में इससे पहले 1951-52 के पहले आम चुनाव के दौरान लगभग 17 करोड़ मतदाताओं का पंजीकरण शून्य से किया गया था। कानूनी रूप से प्रासंगिक ढांचे की धारा 21 (3) किसी भी निर्वाचन क्षेत्र या उसके हिस्से के लिए विशेष पुनरीक्षण की अनुमति देती है।

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