पीलीभीत — उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में विधानसभा मतदाता सूची में गंभीर अनियमिताओं और फेरबदल के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। निर्वाचन कार्य में गंभीर लापरवाही बरतने के दोषी पाए गए दो एसडीएम को उनके पदों से हटाते हुए जिला मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है, जबकि एक कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा समाप्त कर दी गई है। इस पूरे प्रकरण में डेटा ऑपरेटर और अन्यसंबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर विधिक कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली गई है।
यह कार्रवाई मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के निर्देश पर जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी आलोक कुमार की देखरेख में की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, मतदाता सूची के संशोधन और पुनरीक्षण प्रक्रिया की गहन जांच कराई जा रही है, तथा दोनों हटाए गए उपजिलाधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। विस्तृत जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस मामले में कई अन्य अधिकारियों के भी कार्रवाई के दायरे में आने की संभावना जताई जा रही है।
यह पूरा प्रशासनिक घटनाक्रम विपक्षी दलों द्वारा मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर उठाए गए तीखे सवालों के बाद सामने आया है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस संबंध में सोमवार को जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद, बुधवार को प्रदेश कांग्रेस ने राज्य मुख्यालय पर एक प्रेसवार्ता कर एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया।
प्रदेश कांग्रेस के अनुसार, गत 10 अप्रैल को उत्तर प्रदेश में एसआईआर का फाइनल ड्राफ्ट जारी होने के बाद, जुलाई से सितंबर के बीच विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 (पीलीभीत सदर) की मतदाता सूची में भारी फेरबदल किया गया। आरोप है कि इस अवधि के दौरान 13,150 मतदाताओं के एपिक नंबर और सीरियल नंबर समान रखते हुए उनके नाम आंतरिक रूप से बदल दिए गए। इसके अलावा, मौके पर मौजूद 884 वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए और 2600 ऐसे नाम जोड़ दिए गए जो वास्तविक रूप से मौके पर निवास ही नहीं करते हैं। कांग्रेस ने कुल 16,554 वोटों में गड़बड़ी होने का दावा किया है।
प्रशासनिक स्तर पर इस बात की पुष्टि हुई है कि विपक्षी दलों के इन गंभीर आरोपों के बाद कराई गई प्रारंभिक जांच में मतदाता सूची में गड़बड़ी सही पाई गई है। ईआरओ (निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी) के पद पर तैनात रहे पूरनपुर के एसडीएम मयंक गोस्वामी और अमरिया के एसडीएम हेमंत चौधरी को इस गड़बड़ी और प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना गया है। इसके साथ ही, वीआरसी से जुड़े कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार ने स्पष्ट किया है कि सूची संशोधन प्रक्रिया में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सभी के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

