जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में पंजीकरण, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट और प्रवर्तन से जुड़े आठ बड़े सुधारों को मंजूरी दी गई है। हालांकि, बैठक में किसी भी वस्तु या सेवा की कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
जीएसटी परिषद ने स्पष्ट किया है कि कर दरों से जुड़े मामलों पर अब साल में केवल एक बार ही किसी समर्पित बैठक में विचार किया जाएगा। यह बैठक दो-दरों वाली कर संरचना लागू होने के एक साल बाद आयोजित की गई थी।
नवीनतम सुधारों के तहत, व्यापार के नाम, निदेशक, साझेदार या अतिरिक्त कारोबार स्थल के पते जैसे नियमित पंजीकरण संशोधनों को अब स्वचालित रूप से स्वीकार कर लिया जाएगा। नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच लगभग 16.73 लाख पंजीकरण संशोधन आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से लगभग 65.45% आवेदन इसी श्रेणी के थे।
रिफंड प्रक्रिया को तेज करते हुए, रिफंड दावे की पावती मिलने की समय सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। इस अवधि में पावती न मिलने पर दावे को स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा। जोखिम मूल्यांकन के आधार पर कर प्रणाली 90% रिफंड दावों को मंजूरी देगी और आदेश पावती मिलने के तीन कार्य दिवसों के भीतर जारी किए जाएंगे, जो पहले सात दिन थे। इसके अलावा, नकद बहीखाते (कैश लेजर) में बचा हुआ अतिरिक्त शेष पूरी तरह से स्वचालित तरीके से वापस कर दिया जाएगा।
प्रवर्तन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए जीएसटी के तहत गिरफ्तारी की शक्ति को हटा दिया गया है। अभियोजन की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है तथा न्यूनतम सजा का प्रावधान भी समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा, कोई विशिष्ट जुर्माना तय न होने की स्थिति में लगने वाले सामान्य जुर्माने को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि ये प्रवर्तन बदलाव इसलिए संभव हो पाए हैं क्योंकि जीएसटी प्रणालियां अब विक्रेताओं और खरीदारों के बीच चालान का मिलान करने और स्रोत के करीब ही फर्जी क्रेडिट की पहचान करने में सक्षम हैं।
अंतर-राज्यीय स्तर पर माल ले जाने वाले वाहनों को अब केवल विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर और संयुक्त आयुक्त रैंक से नीचे के अधिकारी की पूर्व अनुमति मिलने पर ही रोका जा सकेगा। इसके अलावा, केवल मूल और गंतव्य राज्य ही वाहनों की जांच कर सकेंगे।
छोटे करदाताओं को राहत देते हुए, 5 करोड़ रुपये तक का टर्नओवर रखने वाले और केवल उपभोक्ताओं को आपूर्ति करने वाले करदाता तिमाही आधार पर कर भुगतान करते हुए साल में एक बार रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। कुल 1.05 करोड़ सक्रिय करदाताओं में से लगभग 16.85 लाख करदाता केवल उपभोक्ता आपूर्ति की रिपोर्ट करते हैं, जिनमें से लगभग 99% करदाता 5 करोड़ रुपये की सीमा से नीचे हैं।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर छोटे विक्रेता भौतिक उपस्थिति की शर्त पूरी होने पर सिस्टम की सहमति से दूसरे राज्य में स्थित ई-कॉमर्स ऑपरेटर के गोदाम को अपना मुख्य कारोबार स्थल घोषित कर सकते हैं। इसके साथ ही, कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा, दूरसंचार टावर, कारखाने के बाहर की पाइपलाइनें, मुफ्त नमूने और नष्ट किए जाने वाले कुछ एक्सपायर्ड स्टॉक को इनपुट टैक्स क्रेडिट के दायरे में शामिल कर लिया गया है।
निर्यातकों के लिए, विदेशी ग्राहकों को विदेशी शाखाओं के माध्यम से सेवाएं देने वाली भारतीय कंपनियों और विदेशी ग्राहकों के सामान पर भारत में किए गए काम को निर्यात लाभ के दायरे में रखा गया है। उलटे कर ढांचे (इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर) के तहत 1 नवंबर 2026 से इनपुट सेवाओं पर चुकाए गए कर पर रिफंड मिलना शुरू हो जाएगा, जबकि प्लांट और मशीनरी पर कर रिफंड 1 अप्रैल 2027 से अनुमति दी जाएगी।
मूल्यवान चालान के साथ माल प्राप्त करने और आपूर्तिकर्ताओं को पूरा भुगतान करने वाले वास्तविक खरीदारों को सुरक्षा प्रदान करने के मामले की जांच के लिए अधिकारियों की एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद यह मामला दोबारा जीएसटी परिषद के पास विचार के लिए आएगा। छोटे करदाताओं के लिए दाखिल करने के विकल्प से जुड़ा विस्तृत ढांचा और आवश्यक कानूनी संशोधन परिषद के आगामी बैठक में पेश किए जाएंगे।

