लखनऊ — उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर हेरफेर करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के तहत राज्यभर में लाखों नाम हटाए गए हैं।
कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग द्वारा संचालित इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस मामले का संज्ञान लेने और एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। पार्टी नेताओं के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान उत्तर प्रदेश में कुल 15 करोड़ 41 लाख मतदाता थे, जबकि पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत राज्य में 3 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का दावा किया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजेंद्र पाल गौतम ने दावा किया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में जुलाई से सितंबर के बीच भारी अनियमितताएं हुईं। उनके अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए, 804 नाम हटाए गए और लगभग 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए जो वहां निवास नहीं करते हैं।
सुप्रिया श्रीनेत ने इस संबंध में आंकड़े रखते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और पीलीभीत सदर से विधायक संजय Gangwar ने पिछला विधानसभा चुनाव 6,930 मतों के अंतर से जीता था, जबकि अकेले उसी निर्वाचन क्षेत्र में 16,000 से अधिक नाम मतदाता सूची के इस मामले से जुड़े हैं। कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया और सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर आगे की रणनीति स्पष्ट करते हुए आराधना मिश्रा ‘मौन’ और इमरान मसूद ने कहा कि पार्टी इस मामले में कानूनी सलाह ले रही है और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ेगी। निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

