मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के संसद मार्ग पर सोमवार को हुए उग्र प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा और एक केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान पर हमले के मामले में दिल्ली पुलिस ने चार प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं। पुलिस ने इस सिलसिले में 18 आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया है।
यह प्रदर्शन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के बैनर तले एसआईआर (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर आयोजित किया गया था। रायसीना रोड स्थित मुख्यालय पर प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता सफेद चादर ओढ़कर ‘शव’ के रूप में लेट गए और जंतर-मंतर की ओर बढ़ने का प्रयास किया।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान एक CISF कांस्टेबल बिक्रम कुमार पर उस समय धारदार हथियार से कथित हमला किया गया, जब वह एक प्रदर्शनकारी को बैरिकेड के पास से हटा रहे थे। उनकी दाहिनी कोहनी में मामूली चोट आई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल ले जाया गया। इस हमले के आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है।
दर्ज की गई चार एफआईआर में CISF जवान पर हमला, दंगा भड़काने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लोक सेवकों के काम में बाधा डालने के आरोप शामिल हैं। पुलिस घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। इससे पहले 2 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के संबंध में भी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए थे।
इस बीच, गत शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों द्वारा दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर लगाए गए यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोपों के बीच, एक आरोपी सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) को सोमवार को 11 अन्य अधिकारियों के साथ अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के पद पर पदोन्नत कर दिया गया है। महिला पत्रकारों के इन आरोपों की जांच अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) को सौंप दी गई है।

