भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची संशोधन की एक विवादित प्रक्रिया के तहत करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग (ईसीआई) से जवाब तलब किया है। इस प्रक्रिया के कारण देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने नरेंद्र मोदी सरकार, ईसीआई और ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी कर मतदाता सूची संशोधन पर उठाए गए चिंताओं का स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से जवाब देने को कहा है। अदालत में दाखिल दो याचिकाओं में ईसीआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं और ज्ञानेश कुमार के निर्णयों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) नामक इस प्रक्रिया के तहत अब तक 130 मिलियन (करोड़) से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। इस पर विपक्ष, छात्र संगठनों और युवा-नेतृत्व वाले कॉकरोच मूवमेंट ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों का कहना है कि उनके नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं और उन्हें दोबारा सूची में शामिल कराने में कठिनाई हो रही है। आलोचकों और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाती है।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने ईसीआई पर सरकार के साथ मिलकर वोट चोरी करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, ईसीआई का दावा है कि यह अभियान केवल मृत, दोहरी प्रविष्टि वाले और अयोग्य नामों के साथ-साथ अवैध घुसपैठियों को हटाने के लिए चलाया जा रहा है।
इस विवाद के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। पिछले सप्ताह शुक्रवार को मुंबई में और शनिवार को दिल्ली में हजारों प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकाला। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की आलोचना भी हुई है। पुलिस पर सप्ताहांत के प्रदर्शनों के दौरान तीन पत्रकारों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है, जिस पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह इन आरोपों की जांच कर रही है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान राजधानी में सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित है।

