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फॉर्म-6 में किए गए संशोधनों को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी मंजूरी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि नए मतदाताओं द्वारा भरे जाने वाले फॉर्म-6 में किए गए किसी भी संशोधन को शीर्ष अदालत ने मंजूरी नहीं दी है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने संकेत दिया कि चुनाव आयोग से रिपोर्ट मिलने के बाद अदालत यह जांच करेगी कि फॉर्म में बदलाव किसने किया था।

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि फॉर्म-6 में नए और अवैध बदलाव किए गए हैं। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि फॉर्म-6 में दो नई शर्तें जोड़ी गईं, जिससे नए मतदाताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ने किसी भी संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी है और रिपोर्ट आने के बाद यह देखा जाएगा कि किसने क्या संशोधन किया है।

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याचिकाकर्ता की ओर से पेश दलीलों में आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग के पोर्टल पर जुलाई 2026 में बिना किसी विधाई अधिकार या ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ में संशोधन के डिजिटल रूप से फॉर्म-6 को बदला गया। याचिका में कहा गया कि इस बदलाव से युवा और पात्र नए मतदाताओं को मनमाने ढंग से परेशानी हो रही है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि इस तरह के कृत्य के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

विवाद बढ़ने के बाद, चुनाव आयोग ने उन राज्यों में अपने ईसिनेट एप्लीकेशन पोर्टल से फॉर्म-6 में जोड़े गए विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) से जुड़े घोषणा पत्र को हटा दिया है, जहां एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग ने 26 सितंबर को घोषणा की थी कि गैर-एसआईआर अवधि के दौरान, ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स 1960’ के नियमों के अनुसार ही निर्धारित फॉर्म का उपयोग किया जाएगा।

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