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उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने आठ मौजूदा सांसदों के टिकट काटे

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उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने आठ मौजूदा सांसदों का पत्ता साफ कर दिया है। इन सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान निर्धारित है, और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर तय की गई है।

पार्टी द्वारा टिकट से वंचित किए गए मौजूदा सांसदों में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा के अलावा अरुण सिंह, नीरज शेखर, गीता शाक्य, बृजलाल तथा सीमा द्विवेदी के नाम शामिल हैं। इस फेरबदल में पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की रिक्ति भी शामिल है, जिन्होंने 11 सितंबर को अंडमान एवं निकोबार द्वीप का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उच्च सदन से त्यागपत्र दे दिया था।

आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को तीसरी बार जीतने की रणनीति के तहत बीजेपी ने उम्मीदवारों की नई सूची में जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को साधने पर पूरा जोर दिया है। घोषित आठ प्रत्याशियों में तीन सवर्ण, तीन ओबीसी और दो अनुसूचित जाति वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। ब्राह्मण समुदाय से राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय को जगह मिली है, वहीं लोधी समुदाय से धर्मपाल सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। सूची में पाल और कुर्मी जातियों को भी प्रतिनिधित्व मिला है। महिला वर्ग से प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार में पशुपालन मंत्री रह चुके धर्मपाल सिंह को टिकट देकर पार्टी ने जमीनी और संगठनात्मक पृष्ठभूमि के चेहरों को प्राथमिकता दी है।

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टाइम्स ऑफ इंडिया के सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि पार्टी ने अपने विधायकों वाली 255 विधानसभा सीटों पर जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण कराया था, जिसमें लगभग 100 विधायक कथित रूप से सत्ता विरोधी रुझान यानी एंटी-इनकंबेंसी की चपेट में पाए गए हैं। इस आकलन में मतदाताओं के बीच विधायकों की स्वीकार्यता और स्थानीय संगठन के साथ उनके संबंधों को भी परखा गया, और उम्मीदवारों के चयन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से भी फीडबैक लिए जाने की बात सामने आई है।

इन सबके बीच, केंद्रीय मंत्रियों हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को पुनरुम्मीदवारी न मिलने से मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। संविधान के अनुच्छेद 75(5) के प्रावधान के अनुसार, कोई भी मंत्री बिना संसद के किसी भी सदन की सदस्यता के छह महीने से ज्यादा अपने पद पर नहीं रह सकता है। पुरी और वर्मा का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है, जिसके बाद उनके संसद पहुंचने के वैकल्पिक तरीकों या केंद्र स्तर पर बड़े फेरबदल को लेकर सवाल उठ रहे हैं, हालांकि पार्टी ने इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

उत्तर प्रदेश के अलावा बीजेपी ने उत्तराखंड की राज्यसभा सीट के लिए दिनेश आर्य को मैदान में उतारा है, जबकि पश्चिम बंगाल में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुईं रुक्मिणी कोयल मलिक को उपचुनाव वाली सीट के लिए उम्मीदवार घोषित किया गया है।

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