नई दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को प्रदर्शन के दूसरे दिन दिल्ली पुलिस ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, ऐ सा अध्यक्ष नेहा बोरा और कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज समेत 160 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।
प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर की ओर मार्च शुरू करने के लगभग 15 मिनट के भीतर ही हिरासत में ले लिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को होने वाले किसी भी विरोध प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी और पुलिस को इसकी कोई पूर्व सूचना भी नहीं मिली थी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी।
यह विरोध प्रदर्शन तय समय से करीब दो घंटे की देरी से शुरू हुआ। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने दोपहर 1 बजे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान किया था, जिसके बाद वकील, छात्र और कार्यकर्ता जंतर-मंतर और अशोक रोड के पास एकत्र हुए। भारी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग के बीच दोपहर करीब 3 बजे विट्ठल भाई पटेल हाउस से मार्च शुरू हुआ। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया और लगभग 160 लोगों को हिरासत में लेकर विभिन्न पुलिस थानों में भेज दिया। प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज को अन्य लोगों के साथ बदरपुर पुलिस थाने ले जाया गया।
हिरासत में लिए जाने के बाद, प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो में कहा कि पुलिस लोगों की आवाज़ को दबा नहीं सकती। उन्होंने कहा कि पुलिस ने शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे वकीलों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है और दमन जितना बढ़ेगा, सड़कों पर आवाज़ें उतनी ही तेज होंगी।
इस बीच, स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कथित पुलिस ज्यादती और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ 4 अक्टूबर को एक बार फिर नागरिकों के मार्च का आह्वान किया है। उन्होंने बताया कि यह मार्च दोपहर 3 बजे इंडिया गेट से शुरू होकर जंतर-मंतर तक जाएगा। इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिपाल और प्रशांत भूषण ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया था।

