नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के कथित फैसलों और चुनावी रोल की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के विरोध में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सांसदों ने संसद से निर्वाचन सदन तक एक बड़ा मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने भारी बैरिकेडिंग और तैनाती के बीच कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया।
संसद के मकर द्वार से शुरू हुए इस मार्च में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओब्रायन समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन सदन तक मार्च करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और उनके खिलाफ नारे लगाए।
सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आकाशवाणी भवन और नीति आयोग के पास कड़े इंतजाम किए थे। भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की तैनाती के बीच कई सांसदों को पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़ते देखा गया, जबकि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद बैरिकेड्स पर खड़े देखा गया। पुलिस ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी नेताओं और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई विपक्षी नेताओं और सांसदों को हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने संविधान का उल्लंघन किया है और वह अब पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कथित कदमों से देश में लोकतंत्र समाप्त हो जाएगा और स्थिति हिटलर के शासन जैसी हो जाएगी। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि अब इस्तीफा देने का समय आ गया है।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस मार्च को आड़े हाथों लिया। भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस प्रदर्शन को प्रायोजित करार देते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस पार्टी, देश के लोकतांत्रिक संस्थानों पर हमले कर रही है और अराजकता फैलाकर राहुल गांधी को राजनीतिक रूप से स्थापित करने का प्रयास कर रही है।
इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर रोक लगाने संबंधी एक अंतरिम याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह बिना तथ्यों की पुष्टि के किसी भी पूर्वधारणा के आधार पर आगे नहीं बढ़ सकता। विरोध प्रदर्शनों के पांचवें दिन राजधानी में राजनीतिक सरगर्मी तेज बनी हुई है।

