पटना — निर्वाचन आयोग की विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध में मंगलवार को राजधानी पटना में वाम संगठनों, एनएसयूआई, एसा और आरवाईए के बैनर तले छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान जेपी गोलंबर के पास प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ दी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा इस प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मांग की।
यह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव का बड़ा कारण बना। मार्च को लोक भवन की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने मार्ग पर बैरिकेडिंग की थी, जिसे प्रदर्शनकारियों ने तोड़ दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी डाक बंगला चौराहे की तरफ बढ़े, जहां उन्होंने बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी की और पुलिसर्किमयों के साथ हाथापाई व रस्साकस्सी की। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग के हिस्से भी उखाड़कर ले गए।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हाथों में कई तख्तियां थीं, जिन पर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ तीखे नारे लिखे हुए थे। कुछ पोस्टरों में पुलिस की तैयारियों पर भी सवाल उठाए गए। हालात तब और अनपेक्षित हो गए जब कुछ युवकों ने कथित तौर पर हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को ले जा रहे वाहन की चाबी ले ली और गेट खोलकर बंदियों को भगा दिया।
कानून-व्यवस्था के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (विधि-व्यवस्था-1) कृष्णा मुरारी प्रसाद ने बताया कि इस दौरान 12 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जो बाद में भाग निकले। गांधी मैदान के एसएचओ अखिलेश कुमार मिश्रा ने बताया कि नौ अन्य लोगों को अलग से हिरासत में लेकर मुचलके पर रिछार किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सिटी एसपी (मध्य) चंद्र प्रकाश और एसडीपीओ मनोज कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। करीब तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हुए।
एसा (AISA) के बिहार अध्यक्ष धनंजय ने मांग की कि SIR प्रक्रिया को तुरंत रद्द किया जाए, मतदाता सूचियों से नाम हटाने की प्रक्रिया रोकी जाए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त इस्तीफा दें। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पुनरीक्षण पात्र मतदाताओं के अधिकारों के लिए एक गंभीर खतरा है। एनएसयूआई की प्रदेश उपाध्यक्ष भाग्या भारती ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए चल रही एक व्यापक लड़ाई का हिस्सा है और लोकतंत्र को बचाने की यह लड़ाई दूसरे स्वतंत्रता संग्राम जैसी है।

