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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को शहर से बैरिकेडिंग हटाने और इंटरनेट सेवाएं बहाल करने का निर्देश दिया

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कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को शहरभर से बैरिकेडिंग हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि जब तक कानून-व्यवस्था के समक्ष कोई बड़ी चुनौती न हो, मेट्रो का संचालन सामान्य रखा जाए और इंटरनेट सेवाएं तुरंत बहाल की जाएं।

शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश में कहा कि दिल्ली में लोगों के आने-जाने पर रोक नहीं लगाई जा सकती और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले पत्रकारों, वकीलों तथा नेताओं को अवैध तरीके से हिरासत में नहीं लिया जा सकता। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील शहदान फरासत ने आरोप लगाया कि वकीलों को घसीटकर बसों में भरा गया और दूर ले जाकर छोड़ा गया। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि वकीलों को उनके पेशेवर काम से नहीं रोका जाना चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि शनिवार को कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 स्टेशन बंद किए गए थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को बंद किए गए मेट्रो स्टेशनों का विवरण नक्शे पर दिखाने का निर्देश देते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट होगा कि स्टेशनों के बंद रहने से आम जनता पर कितना प्रभाव पड़ा। जनपथ और कर्तव्य पथ के आसपास मोबाइल इंटरनेट बंद किए जाने की न्यायिक समीक्षा की मांग वाली याचिका पर भी अदालत ने सुनवाई की।

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इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर के उस आदेश का पालन न किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया, जिसमें मेट्रो स्टेशनों और सार्वजनिक परिवहन को बाधित न करने के निर्देश दिए गए थे। आदेशों की अवहेलना और मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने प्रशासन से मंगलवार तक यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

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