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दिल्ली में चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़े प्रदर्शन से पहले पुलिस ने एक हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया

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नई दिल्ली में शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन से पहले पुलिस ने एक हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए लोगों में विपक्षी राजनेता, छात्र संघ नेता, वकील, पत्रकार और व्यंग्यात्मक ‘कॉक्रोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के संस्थापक शामिल हैं।

प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त और शासक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए मतदाता सूची में हेरफेर करने और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। सीजेपी और अन्य युवा समूहों ने मध्य दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों लोगों को इकट्ठा करने की योजना बनाई थी, लेकिन सुरक्षा बलों ने प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही क्षेत्र को सील कर दिया।

राजधानी में बड़े पैमाने पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द कर दिया गया, मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं तथा मेट्रो स्टेशन और बाजार बंद रखे गए। पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को मुंबई से नई दिल्ली आने वाले विमान के भीतर से ही हिरासत में ले लिया। इसके अलावा यूट्यूबर ध्रुव राठी, एइसा (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, माकपा महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, राजनीतिक नेता योगेंद्र यादव और ममता बनर्जी को भी हिरासत में लिया गया।

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व्यापक पाबंदियों के बावजूद, दिल्ली हाट सहित शहर के अन्य हिस्सों में छोटे पैमाने पर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनों को कवर करने की कोशिश कर रहे पत्रकारों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की राज्य समिति की सदस्य श्रणया ने इस कार्रवाई को तानाशाही करार देते हुए कहा कि छात्र और युवा अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर वापस लौटेंगे।

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर केंद्र सरकार की निंदा करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने लोकतंत्र की जननी को ‘दबाए गए लोकतंत्र’ में बदल दिया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बोर्ड के अध्यक्ष आकार पटेल ने सभी हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की। कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) के एशिया प्रशांत कार्यक्रम समन्वयक कुणाल मजूमदार ने भी पुलिस से हिरासत में लिए गए पत्रकारों को तुरंत रिहा करने का आग्रह किया है।

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पाथ ने प्रदर्शनकारियों को ‘अराजक तत्व’ करार देते हुए कहा कि उनकी यह योजना पूरी तरह विफल हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक और हार्ड न्यूज मैगजीन के संपादक संजय कपूर ने कहा कि सरकार की यह कार्रवाई उसकी घबराहट को दर्शाती है। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आए हैं जब देश में आगामी महीनों में महत्वपूर्ण राज्य चुनाव होने हैं।

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