द्रमुक अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे विपक्षी नेताओं की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने शनिवार को इसे ‘अघोषित आपातकाल’ करार देते हुए कहा कि इससे आपातकाल के दौर की दर्दनाक यादें ताजा हो गईं।
सोशल मीडिया पर जारी अपने बयानों में श्री स्टालिन ने कहा कि मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे पूर्व मुख्यमंत्रियों पिनाराई विजयन, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, और मानिक सरकार के साथ-साथ माकपा महासचिव एम.ए. बेबी और छात्र संगठनों के नेताओं को केंद्र सरकार ने हिरासत में ले लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी ओर, ‘देशद्रोह के कृत्य’ के लिए मुकदमे का सामना करने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार जेड-प्लस सुरक्षा के साथ खुलेआम घूम रहे हैं।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए द्रमुक प्रमुख ने कहा कि एसआईआर के पीछे का षड्यंत्र पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की घेराबंदी करने, इंटरनेट बंद करने और राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लेने से देश के युवाओं के विद्रोह को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने सभी हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल रिहाई, सीईसी ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने और एसआईआर पर रोक लगाने की मांग की।
तमिलनाडु की सरकार पर निशाना साधते हुए श्री स्टालिन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ‘अपने दिल्ली के आकाओं को खुश करने’ में लगी है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस दमन का यह रवैया अस्वीकार्य है और असहमति कोई अपराध नहीं है। उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और अखंडता बहाल करने की भी मांग की है।

