स्पेसएक्स के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क ने आरोप लगाया है कि भारत में स्टारलिंक की सेवाओं में बाधा डाली जा रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जवाब में कहा कि कुछ उद्योगपति देश के लोगों पर अपना ‘एकाधिकार’ बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को रोक रहे हैं।
वर्तमान में, स्पेसएक्स की उपग्रह इंटरनेट इकाई स्टारलिंक भारत में अपनी वाणिज्यिक सेवाएं शुरू करने के लिए अंतिम स्वीकृतियों का इंतजार कर रही है। हालांकि कंपनी को अन्य कंपनियों के साथ उपग्रह संचार सेवाएं प्रदान करने के लिए सरकारी लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन परिचालन शुरू करने से पहले स्पेक्ट्रम आवंटन, सुरक्षा मंजूरी और विदेशी निवेश से जुड़ी विनियामक स्वीकृतियां प्राप्त होना अभी बाकी है। इस संबंध में दूरसंचार विभाग (डीओटी) को भेजे गए ईमेल पर रिपोर्ट प्रकाशित होने तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान स्टारलिंक बिजनेस ऑपरेशंस की उपाध्यक्ष लॉरेन ड्रेयर ने कहा कि कंपनी ने भारत की सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप अपने परिचालन को तैयार किया है। उन्होंने बताया कि भारतीय नियमों का पालन करते हुए भारत का उपयोगकर्ता डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित रखा जाएगा। ड्रेयर के अनुसार, कंपनी ने सैकड़ों एंटेना वाले 20 गेटवे स्थल स्थापित कर लिए हैं और वह परिचालन शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि स्टारलिंक पिछले पांच वर्षों से भारतीय नियामकों और ऑपरेटरों के साथ काम कर रहा है और यह सेवा दूरदराज के क्षेत्रों में आखिरी छोर तक कनेक्टिविटी की चुनौती से निपटने में मदद कर सकती है।
व्यापारिक स्तर पर, स्टारलिंक ने भारत में भारती एयरटेल के साथ साझेदारी की है। मार्च 2025 में एयरटेल ने अपने ग्राहकों और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं तक स्टारलिंक सेवाएं पहुंचाने, ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को जोड़ने तथा एयरटेल के ग्राउंड नेटवर्क बुनियादी ढांचे का उपयोग करने के लिए समझौते की घोषणा की थी।

