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महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण की अंतिम तिथि बढ़ाने पर विचार, सूखे और पलायन के चलते उठाया जा सकता है कदम

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पुणे —

महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की 26 अक्टूबर की निर्धारित अंतिम तिथि को आगे बढ़ाने पर राज्य सरकार विचार कर रही है। राज्य में सूखे जैसे हालात और ग्रामीण इलाकों से बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन को देखते हुए यह कदम उठाया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है।

वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों के अनुसार, जल संकट, कृषि नुकसान और रोजगार की तलाश में जुटे किसानों तथा ग्रामीण परिवारों के लिए बूथ-लेवल अधिकारियों (BLOs) तक पहुंचना और समय पर आवेदन जमा करना मुश्किल हो रहा है। इसके मद्देनजर समयावधि बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि पात्र मतदाताओं को पंजीकरण, विवरण में सुधार या आपत्ति दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

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चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि समयावधि बढ़ाई जाती है, तो इसके लिए राज्य सरकार को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को एक औपचारिक अनुरोध भेजना होगा, क्योंकि अंतिम निर्णय लेने का अधिकार निर्वाचन आयोग के पास ही है। वर्तमान प्रक्रिया के तहत, फॉर्म 6, 7 और 8 के अंतर्गत अब तक लगभग 17.73 लाख आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिन पर प्रक्रिया जारी है। इनमें सबसे अधिक संख्या फॉर्म 6 के आवेदनों की है।

इस पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया का कार्यक्रम पहले भी कई बार संशोधित किया जा चुका है। घर-घर जाकर गणना का अभियान 30 जून को शुरू हुआ था और 8 अगस्त तक चलना था, जिसे भारी बारिश और आषाढ़ी वारी जैसी परिचालन संबंधी कठिनाइयों के चलते 17 अगस्त तक बढ़ाया गया था। इसके बाद प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन को 24 अगस्त से बढ़ाकर 31 अगस्त किया गया था।

दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि मूल रूप से 30 सितंबर को समाप्त होनी थी, जिसे पहले 12 अक्टूबर और बाद में निर्वाचन आयोग द्वारा बढ़ाकर 26 अक्टूबर किया गया। वहीं, नोटिस जारी करने तथा दावों और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया 10 नवंबर तक जारी रहने की संभावना है। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन अब 16 नवंबर को किया जाएगा, जिसे पहले 27 अक्टूबर और फिर 4 नवंबर के लिए निर्धारित किया गया था।

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