नयी दिल्ली — कांग्रेस ने रविवार को निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों को पठनीय प्रारूप में मतदाता सूचियां उपलब्ध कराने के निर्णय का स्वागत किया, लेकिन इसे अपर्याप्त बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को तत्काल निलंबित करने की अपनी मांग को दोहराया।
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी पिछले दो वर्षों से चुनाव पैनल से सभी राजनीतिक दलों को खोजने योग्य (सर्च करने योग्य) प्रारूप में मतदाता सूचियां उपलब्ध कराने की लगातार मांग कर रहे थे। रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि इस मांग को बार-बार ठुकराया गया, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने 2018 में तब खोजने योग्य मतदाता सूचियां देना बंद कर दिया था जब कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी मतदाताओं का पता लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘वोट चोरी’ को सक्षम बनाने के लिए यह मांग आठ साल तक अस्वीकार की गई।
निर्वाचन आयोग ने 15 अक्टूबर 2026 को एक आदेश जारी कर विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) के लिए राजनीतिक दलों को खोजने योग्य प्रारूप में मतदाता सूचियां उपलब्ध कराने की घोषणा की है। दो साल के अंतराल के बाद 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसएसआर फिर से शुरू हुआ है। रमेश ने दावा किया कि यह बदलाव इसलिए आया है क्योंकि पूरा देश ‘वोट चोरों’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी ‘वोट चोरी’ पकड़ी जाती है, मोदी सरकार पठनीय मतदाता सूचियां रोकना, फर्जी मतदाताओं को जोड़ना और एसआईआर जैसे नए तरीके अपनाती है।
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर काम करने तथा निर्वाचन आयोग में जनता के विश्वास को नष्ट करने का आरोप लगाया। रमेश ने कहा कि उन्हें पद छोड़ना होगा और इसके साथ ही आयोग तथा उसकी आईटी प्रणाली का पूरी तरह से पुनर्गठन किया जाना आवश्यक है। पार्टी ने 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के मताधिकार के संवैधानिक अधिकार को खतरे में डालने वाले एसआईआर को तुरंत निलंबित करने की मांग की।
निर्वाचन आयोग ने उन 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) का आदेश दिया है जहां ‘अगले साल की शुरुआत’ में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन क्षेत्रों में अंतिम मतदाता सूचियां 4 जनवरी को प्रकाशित की जाएंगी।
एक वरिष्ठ चुनाव आयोग अधिकारी ने स्पष्ट किया कि एसएसआर चुनाव कानून के तहत एक अनिवार्य वार्षिक प्रक्रिया है, जिसे विशेष रूप से चुनाव वाले राज्यों में आयोजित किया जाता है। इन 17 राज्यों में मतदाताओं की सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पूरा हो चुका है, जबकि असम में कानूनी कारणों से एसआईआर के बजाय एक विशेष पुनरीक्षण किया गया था।
निर्वाचन आयोग के नए आदेश के तहत पहली बार राजनीतिक दलों को मसौदा और अंतिम चरणों में हार्ड और सॉफ्ट दोनों संस्करणों में ‘पठनीय’ मतदाता सूचियां साझा की जाएंगी। चुनाव वाले राज्यों में उम्मीदवारों को भी मसौदा और अंतिम सूचियां उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा, चुनाव से पहले निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा अन्य व्यक्तियों को भी बिक्री के लिए ये सूचियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

