नयी दिल्ली — जुलाई महीने में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा की जांच कर रही सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्च अधिकार प्राप्त जांच समिति (एचपीईसी) आगामी 29 और 30 अक्टूबर को दो दिवसीय बैठक करेगी। इस दौरान समिति प्रभावित लोगों की बात सुनेगी और कथित हिंसा से जुड़े साक्ष्य दर्ज करेगी। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
यह समिति शिक्षा सदन, 17 राऊज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित अपने कार्यालय में सुबह 11 बजे से अपनी कार्यवाही शुरू करेगी। हिंसा से प्रभावित कोई भी व्यक्ति या आम नागरिक वैध पहचान पत्र के साथ 29 और 30 अक्टूबर को दोपहर 11:30 बजे से दोपहर 3:00 बजे के बीच वॉक-इन के जरिए अपनी शिकायतें, अभ्यावेदन या साक्ष्य प्रस्तुत कर सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, यह पांच सदस्यीय पैनल विशेष रूप से पैलेट गन के कथित इस्तेमाल, लक्षित हिंसा, महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न के साथ-साथ दोनों पक्षों की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की जांच करेगा। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए आंदोलन के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ज्यादती और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के काउंटर-आरोपों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने इस समिति का गठन किया था।
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाले इस पैनल में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।
व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने और संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा के लिए समिति ने एक ऑनलाइन पोर्टल hpec.nic.in भी शुरू किया है। प्रभावित व्यक्ति, गवाह और संबंधित पक्ष अपने बयान, अभ्यावेदन और सहायक दस्तावेज अपलोड करने के लिए इस पोर्टल पर दिए गए निर्धारित प्रारूप का उपयोग कर सकते हैं।
इससे पहले जारी एक सार्वजनिक नोटिस में कहा गया था कि संवेदनशील गवाहों के हितों की रक्षा करने और प्रभावित व्यक्तियों व अन्य संबंधित पक्षों द्वारा सामग्री जमा करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत यह ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है। शीर्ष अदालत ने एचपीईसी को निर्देश दिया है कि वह संवेदनशील गवाहों को पूरी सुरक्षा प्रदान करे, उनकी पहचान गोपनीय रखे और उनके द्वारा सौंपे गए बयानों व साक्ष्यों की पूरी गोपनीयता बनाए रखे।
उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई को सीजेपी के नेतृत्व में संसद तक निकाले गए मार्च के दौरान सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं, जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया था। इस दौरान पैलेट गन के संभावित इस्तेमाल के कारण कुछ छात्रों को चोटें आईं और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। जंतर-मंतर पर 20 जून को शुरू हुआ और कई शहरों में फैला यह छात्र-नेतृत्व वाला आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रadhan के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को समाप्त कर दिया गया था।

