पेरिस — फ्रांस में माध्यमिक विद्यालयों की जर्जर स्थिति, शिक्षकों की कमी और असमान शिक्षा प्रणाली को लेकर शुरू हुए छात्र आंदोलन ने अब व्यापक रूप ले लिया है। इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन में अब ट्रेड यूनियन, शिक्षक और ‘येलो वेस्ट’ कार्यकर्ता भी शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। आंदोलन के इस नए चरण से राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है।
यह आंदोलन सितंबर के मध्य में पेरिस के उपनगर क्रीटेल स्थित एक हाई स्कूल से शुरू हुआ था। हालात से निपटने के दौरान पुलिस कार्रवाई में भारी संख्या में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और झड़पों में जख्मी होने की खबरें सामने आई हैं। मानवाधिकार वकीलों के अनुसार, पुलिस की कार्रवाई में कई किशोरों को गंभीर चोटें आईं, जिनमें लेंस शहर में स्टन ग्रेनेड फटने से एक 15 वर्षीय छात्र का हाथ कट जाना और टूर्स शहर में रबर की गोली लगने से एक 16 वर्षीय छात्र की दृष्टि जाना शामिल है।
अधिकारियों ने इस अशांति को दशकों के सबसे हिंसक प्रदर्शनों में शुमार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, आंदोलन की शुरुआत से अब तक 900 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो चुके हैं। इसके अलावा, इस हफ्ते प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार सितंबर के मध्य से अब तक 6,700 से अधिक बच्चों को पुलिस हिरासत में लिया गया है। ट्रैकिंग वेबसाइट ’17octobregiletjaune.net’ के मुताबिक, फ्रांस भर में 1,750 से अधिक प्रदर्शन स्थलों की सूची तैयार की गई है, और शनिवार के प्रदर्शनों में ‘येलो वेस्ट’ कार्यकर्ताओं ने भी छात्रों के साथ जुड़ने का आह्वान किया है।
राजनीतिक और प्रशासनिक मोर्चे पर सरकार गंभीर चुनौतियों से घिरी है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने गुरुवार को स्वीकार किया कि देश इस समय थकान और स्थायी-संकट के दौर से गुजर रहा है। बढ़ते विरोध को थामने के लिए सरकार ने उच्च शिक्षा पंजीकरण शुल्क बढ़ाने की योजना को रद्द कर दिया है, 3,000 वैकल्पिक शिक्षकों की नियुक्ति का वादा किया है और छात्रों के लिए एक ऑनलाइन सर्वेक्षण शुरू किया है। हालांकि, सरकार ने सुदूर-वामपंथी पार्टी ‘फ्रांस अनबाउंड’ (LFI) पर प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप लगाया है, जिसे पार्टी ने सिरे से खारिज कर दिया है। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने शुक्रवार को कहा कि शहरी हिंसा की स्थिति में पुलिस को स्टन ग्रेनेड के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि में फ्रांस की गहरी आर्थिक और राजकोषीय समस्याएं भी जुड़ी हैं। पिछले साल देश का राजकोषीय घाटा 152.5 अरब यूरो (171.3 अरब डॉलर) यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 5.1 प्रतिशत दर्ज किया गया था। वहीं, सार्वजनिक कर्ज बढ़कर जीडीपी का 115.6 प्रतिशत हो गया है, जो ग्रीस और इटली के बाद यूरोपीय संघ में तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके अतिरिक्त, इस सप्ताह जारी एक सरकारी रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले साल शिक्षा मंत्रालय के बजट का 32 प्रतिशत हिस्सा सेवानिवृत्त सिविल सेवकों की पेंशन पर खर्च होगा। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने सितंबर में अपनी रिपोर्ट में बताया था कि फ्रांस के 15 वर्षीय छात्रों के गणित और पठन कौशल के परिणाम रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।
आंदोलनों के बीच फ्रांस की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शनिवार को आहूत प्रदर्शन बड़े और समन्वित जन-आंदोलन का रूप लेते हैं या नहीं। साथ ही, 2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले विभाजित संसद में बजट विधेयक पर बहस होनी है, जिससे राजनीतिक सरगर्मी और तेज होने के आसार हैं।

