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भारत

विपक्ष ने मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन शुरू किया

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मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और एसआईआर (SIR) के मुद्दों को लेकर विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक लंबे और आक्रामक आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। यह अभियान केवल एक-दो दिन का नहीं होगा, बल्कि इसे एक निरंतर चलने वाले बड़े राजनीतिक अभियान का रूप दिया जाएगा।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस महासचिवों और प्रदेश प्रभारियों को स्पष्ट हिदायत दी है कि यह संघर्ष लंबा चलेगा। इसी रणनीति के तहत मंगलवार को संसद भवन से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला गया, जिसमें आकाशवाणी भवन के पास धरना देकर इस विरोध प्रदर्शन को और तेज कर दिया गया।

इससे पहले इंडिया गठबंधन की बैठक में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ कई महीनों तक अभियान चलाने की घोषणा की गई थी। कांग्रेस ने सोमवार को एसआईआर के तहत हटाए गए नामों को दोबारा जुड़वाने के लिए एक महीने तक चलने वाले घर-घर अभियान का ऐलान किया था। संसद से चुनाव आयोग तक निकाले गए इस मार्च में इंडिया गठबंधन की पार्टियों के साथ-साथ बीजू जनता दल (बीजद) की मौजूदगी ने भी इस मुहिम को समर्थन दिया है।

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विपक्ष ने सबसे पहले 7 अगस्त 2025 को यह मुद्दा उठाया था। राहुल गांधी ने तब महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक के उदाहरण देते हुए मीडिया के सामने सवाल रखे थे। पश्चिम बंगाल एसआईआर में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जाने और वहां भाजपा की जीत के बाद विपक्षी दलों में एकजुटता और गहरी हो गई। इसके बाद मीडिया में आई एसआईआर संबंधी रिपोर्टों ने आम मतदाताओं के मन में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं।

रणनीतिकारों का मानना है कि इस पूरे आंदोलन में विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता है, जिसे संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार तोड़ने में असफल रही थी। यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो आगामी शीतकालीन सत्र में भी जोरदार हंगामा तय माना जा रहा है और आंदोलन को और आक्रामक रूप दिया जाएगा।

इंडिया गठबंधन ने अन्य कार्यक्रमों के अलावा देश भर में पांच बड़ी रैलियों का भी ऐलान किया है। रणनीतिकार यह भी मान रहे हैं कि विपक्षी दलों के इस आक्रामक और एकजुट रुख के चलते सरकार के लिए राजनीतिक बचाव करना आसान नहीं होगा, क्योंकि एसआईआर के मामले को लेकर आम मतदाता पहले से ही असहज स्थिति में हैं।

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