इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा और पंचायत चुनाव की मतदाता सूचियों में भारी अंतर पाए जाने पर केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों आयोगों को चार हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।
यह निर्देश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने रायबरेली जिले की मखदूमपुर ग्राम पंचायत के निवासी रोहित की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है।
याची पक्ष की पैरवी कर रहे अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने अदालत को बताया कि संबंधित ग्राम पंचायत के पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव के लिए तैयार की गई मतदाता सूचियों में 468 मतदाताओं का अंतर है। याचिका में यह भी दलील दी गई कि जहां पंचायत चुनाव की सूची में 1,987 मतदाता दर्ज हैं, वहीं विधानसभा चुनाव की सूची में केवल 1,519 मतदाताओं के नाम ही शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान केंद्रीय चुनाव आयोग के वकील ने पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि दोनों सूचियों को तैयार करने के मानक भिन्न निर्धारित हैं। उनके अनुसार, विधानसभा चुनाव के लिए बनने वाली सूची से उन व्यक्तियों के नाम हटा दिए जाते हैं जो पिछले तीन या उससे अधिक वर्षों से संबंधित विधानसभा क्षेत्र में निवास नहीं कर रहे होते हैं।
इस बीच, उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों के लिए जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार राज्य में कुल मतदाताओं का आंकड़ा 12 करोड़ 58 लाख 51 हजार 570 हो गया है। वर्ष 2021 के आंकड़ों के मुकाबले इस बार मतदाताओं की संख्या में 29 लाख 1 हजार 518 की वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान सूचियों में कुल 2 करोड़ 32 लाख 24 हजार 805 नए नाम जोड़े गए, जबकि मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र पाए गए 2 करोड़ 3 लाख 23 हजार 287 नाम हटाए गए। इन आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में सबसे अधिक मतदाताओं वाले जिलों में जौनपुर 36 लाख 97 हजार 376 मतदाताओं के साथ पहले स्थान पर है, जबकि इसके बाद प्रयागराज में 34 लाख 95 हजार 203, सीतापुर में 31 लाख 18 हजार 29, गोरखपुर में 29 लाख 63 हजार 142 और लखीमपुर खीरी में 28 लाख 87 हजार 290 मतदाता दर्ज हैं।

