प्रयागराज — इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड मामले में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का स्वतः संज्ञान लेते हुए दिया है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा यह स्पष्ट न किए जाने पर नाराजगी जताई है कि हादसे का शिकार हुई बस में नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
यह मामला 24 सितंबर 2026 को यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए बस अग्निकांड से जुड़ा है, जिसके बाद 25 सितंबर को हाईकोर्ट ने इसका स्वतः संज्ञान लिया था। अदालत ने अपने निर्देश में कहा है कि यदि मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो केवल चालक और परिचालक ही नहीं, बल्कि लाइसेंस धारक के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर बस संचालन पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को तय की गई है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह रात में बसों की जांच, निर्धारित स्थानों पर उनके रुकने की व्यवस्था की निगरानी और मॉडिफाइड बसों की जांच के लिए एक समेकित योजना तैयार कर अगली तिथि पर पेश करे। साथ ही केंद्रीय मंत्रालय के सचिव को भी इस संबंध में नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
इससे पहले परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा अदालत में एक हलफनामा दाखिल किया गया था। हलफनामे के मुताबिक, अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 के बीच नियमों का उल्लंघन करने वाली 7,665 बसों का चालान किया गया और 1,008 बसें सीज की गईं। इसके अलावा स्लीपर बसों के लिए जारी ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 2023 में 252 थी और बढ़कर अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 1,104 हो गई।
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के हवाले से यह भी सामने आया है कि जनवरी 2023 से 10 दिसंबर 2025 के बीच देश भर में बसों में आग लगने की 45 घटनाएं हुईं, जिनमें 64 यात्रियों की मौत हो गई और 145 अन्य घायल हुए। उत्तर प्रदेश में भी पूर्व में ऐसे कई सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें जुलाई 2023 में रायबरेली-प्रयागराज-लखनऊ मार्ग पर तीन, नवंबर 2024 में कन्नौज-लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर चार और दिसंबर 2025 में यमुना एक्सप्रेसवे पर 13 लोगों की जान जाने की घटनाएं शामिल हैं।

