लखनऊ — भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने उत्तर प्रदेश की पीलीभीत सदर विधानसभा सीट की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिलने के बाद बुधवार को सख्त कदम उठाया है। आयोग ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और मतदाता पंजीकरण केंद्र (वीआरसी) के ऑपरेटर को उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया है। साथ ही, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई विपक्षी दलों द्वारा मतदाता सूचियों में अनियमितता की शिकायतों के बाद की गई है। समाजवादी पार्टी और उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि मतदाताओं के मताधिकार को बाधित करने के लिए राज्य की मतदाता सूचियों में छेड़छाड़ की जा रही है, जिसमें पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की 13,150 प्रविष्टियों में गड़बड़ी का हवाला दिया गया था। जिला निर्वाचन अधिकारी की जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ऑनलाइन पोर्टल पर कुछ मतदाताओं का ईपिक (EPIC) नंबर दर्ज करने पर अन्य मतदाताओं का विवरण प्रदर्शित हो रहा था।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिन्वा ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों की सभी विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की गहन जांच करें और दो दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, दोषी अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की सुसंगत धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके अलावा, पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में तत्काल सुधार करने और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश भी दिए गए हैं।

