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भारत

मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ सीपीएम ने विपक्ष को किया एकजुट

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तिरुवनंतपुरम —

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई है। इस मुद्दे को लेकर पार्टी ने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर और बाहर के दलों को एक मंच पर लाने का काम किया है।

राजनीतिक गलियारों में इस लामबंदी को एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सीपीएम महासचिव एम. ए. बेबी ने इस सिलसिले में विपक्षी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार के कदमों के खिलाफ एकजुट प्रतिक्रिया देने का आग्रह किया था। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी संपर्क साधा था।

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पॉलिट ब्यूरो के अनुसार, 23 सितंबर को ही यह स्पष्ट हो गया था कि एसआईआर का यह मुद्दा निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की दिशा बदल सकता है। इसके बाद 30 सितंबर को ‘इंडिया’ गठबंधन की समन्वय बैठक हुई, जिसमें विपक्षी नेताओं ने एसआईआर और निर्वाचन आयोग के खिलाफ संयुक्त राजनीतिक कार्रवाई के कार्यक्रम पर सहमति जताई। इसी कड़ी में 10 अक्टूबर को दिल्ली में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें पिनाराई विजयन, माणिक सरकार, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे प्रमुख नेता शामिल हुए।

गौरतलब है कि पिछले एक दशक से अधिक समय से राष्ट्रीय राजनीति के हाशिए पर चल रही सीपीएम के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। इससे पहले सितंबर 2024 में तत्कालीन महासचिव सीताराम येचुरी का निधन हो गया था, जो कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी नेताओं के साथ करीबी तालमेल रखते थे।

इस बीच, विजयन कृष्णन ने कहा कि सीपीएम ने लगातार छात्रों, किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को उठाया है और साल 2014 के बाद मोदी सरकार को भूमि अधिग्रहण अध्यादेश तथा कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर करने में पार्टी ने बड़ी भूमिका निभाई थी। हालांकि, यह देखना अभी बाकी है कि यह क्रॉस-पार्टी लामबंदी एक स्थायी राजनीतिक गठबंधन का रूप ले पाती है या नहीं।

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