ग्राम प्रधानों को हटाने का अधिकार नहीं होगा, डीबीटी से मिलेगा भुगतान और आंदोलन समाप्त
उत्तर प्रदेश के पंचायत सहायकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुई चर्चा के बाद राज्य सरकार ने पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाने के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सामाजिक सुरक्षा के फैसले लिए हैं। इन निर्णयों के बाद पंचायत सहायकों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है।
‘लाइव हिंदुस्तान’ की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसके बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन बड़े फैसलों की घोषणा की गई। सरकार के इन कदमों से प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को सीधा लाभ मिलेगा।
तय किए गए नए प्रावधानों के तहत पंचायत सहायकों का मानदेय 6 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 9 हजार रुपये कर दिया गया है, जो कि 50 प्रतिशत की सीधी वृद्धि है। इसके अलावा मानदेय भुगतान की प्रक्रिया में भी बदलाव किया जाएगा। अभी तक यह राशि राज्य वित्त आयोग के फंड से मिलती थी, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा।
सेवा सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने प्रावधान किया है कि अब ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव अपनी मर्जी से किसी पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे। सेवा समाप्ति या हटाने का अधिकार केवल जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी के पास होगा। साथ ही, आंदोलन के दौरान जिन सहायकों को हटाया गया था उन्हें बहाल किया जाएगा और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे भी वापस लिए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त, महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा और सभी पंचायत सहायकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। मंत्रियों के साथ हुई सकारात्मक वार्ता और इन मांगों के पूरी तरह माने जाने के बाद पंचायत सहायकों ने अपना धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी।

