कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवा संगठनों और नागरिक समाज का समर्थन किया है, लेकिन अपने बयानों में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का कोई जिक्र नहीं किया है। CJP ने हालिया प्रदर्शनों में प्रमुख भूमिका निभाई है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से खर्गे ने कांग्रेस की तीन ‘गैर-समझौता योग्य’ मांगें रखीं। इनमें ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR को रद्द करना और बैलेट पेपर से चुनाव कराना शामिल है। खर्गे ने लिखा कि इन मुद्दों को लेकर देश भर में कांग्रेस कार्यकर्ता और इंडिया गठबंधन के साथी सड़कों पर उतरे हैं। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में जो भी नागरिक समाज के सदस्य और युवा संगठन इन मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं, कांग्रेस उनके साथ खड़ी है।
सूत्रों के अनुसार, CJP एक युवा-संचालित संगठन है जिसने देश के युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाई है। तृणमूल कांग्रेस, माकपा और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) जैसे कुछ इंडिया ब्लॉक सहयोगियों ने CJP का समर्थन किया है, लेकिन कांग्रेस ने इस संगठन को राजनीतिक वैधता देने से इनकार किया है। CJP ने 10 अक्टूबर से दिल्ली में एक और दौर के धरने की घोषणा की है।
हालिया प्रदर्शनों में CJP, वाम दलों और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई, जबकि कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI इस दौरान नजर नहीं आई। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि NSUI ने अपने तरीके से ज्ञानेश कुमार का मुद्दा उठाया था, लेकिन वह CJP और AAP के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों से दूरी बनाए रखना चाहती थी। पार्टी के भीतर यह असमंजस है कि एक तरफ CJP को छात्रों का प्रमुख गोलबंदकर्ता माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ हालिया दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनावों में करारी शिकस्त खाने वाली NSUI छात्रों को आकर्षित करने में विफल रही है।
कांग्रेस के एक अन्य नेता का कहना है कि CJP के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों से अलगाव पार्टी के फ्रंटल संगठनों को नुकसान पहुंचा सकता है। पार्टी या तो अपना खुद का विरोध प्रदर्शन प्लान लेकर आए या फिर CJP की भूमिका को स्वीकार करे। इस बीच, भारतीय युवा कांग्रेस ने विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन निकाले, जिसके दौरान कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया या गिरफ्तार किया।
कांग्रेस सचिव प्रणव झा ने कहा कि जब पार्टी ने जांच की मांग शुरू की, तो चुनाव आयोग ने अस्पष्ट स्पष्टीकरण दिए। उन्होंने कहा कि SIR चुनावी घोटालों की सार्वजनिक जांच से बचने की एक प्रतिक्रिया थी। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी द्वारा शुरू किया गया अभियान अब एक जन आंदोलन बन चुका है। CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरभ दास ने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग संविधान और देश को बचाने का ठेका केवल अपने पास मानते हैं।

