वाशिंगटन —
अमेरिका के पिछले दो दशकों के चुनावी इतिहास में मतदाता सूचियों में तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ियों के कारण तीस हजार से अधिक ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में जुड़ गए हैं, जिन्होंने खुद को गैर-नागरिक घोषित किया था। आधिकारिक दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह समस्या देश के एक दर्जन से अधिक राज्यों में सामने आई है, जिसमें डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन दोनों के राजनीतिक गढ़ शामिल हैं।
यह प्रशासनिक चूक मुख्य रूप से ड्राइविंग लाइसेंस और सरकारी पहचान पत्र (आईडी) बनवाने की प्रक्रिया के दौरान हुई। आवेदन पत्र भरते समय नागरिकता वाले कॉलम में सही जानकारी देने या ‘नहीं’ लिखने के बावजूद सॉफ्टवेयर की तकनीकी त्रुटियों और दफ्तर की मामूली गलतियों के कारण ये नाम मतदाता सूचियों में दर्ज हो गए। अकेले न्यू जर्सी राज्य में जून 2023 से जून 2024 के बीच लगभग 6,600 ऐसे गैर-नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में जुड़े, जिन्होंने अपनी नागरिकता को लेकर नकारात्मक जवाब दिया था। इसके अलावा कैलिफोर्निया, इलिनोइस, आयोवा, नेवादा, ओहियो, ओरेगन, पेनसिल्वेनिया, दक्षिण डकोटा, टेक्सास, यूटा और वर्जीनिया जैसे राज्यों में भी इसी तरह की त्रुटियों की पुष्टि हुई है।
इस मुद्दे ने अमेरिका में एक तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके समर्थकों का दावा है कि गैर-नागरिकों द्वारा मतदान किया जाना एक बहुत बड़ी समस्या है और यह विपक्षी डेमोक्रेट्स पार्टी की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। इसके विपरीत, अधिकारियों का कहना है कि ये गड़बड़ियां किसी साजिश का परिणाम नहीं थीं, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर हुई अनजाने में की गई गलतियों का नतीजा थीं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के कुल 17 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं के मुकाबले तीस हजार से अधिक गलत नाम जुड़ने का यह आंकड़ा बेहद छोटा है, जिससे आम चुनावों के परिणामों पर किसी बड़े असर की संभावना नहीं जताई गई है। इसके बावजूद, ट्रंप समर्थक इस पूरी स्थिति को लेकर मुखर हैं और वे सांसदों पर लगातार दबाव बना रहे हैं कि मतदाता पंजीकरण के नियमों को बेहद सख्त किया जाए तथा पंजीकरण के वक्त नागरिकता का पक्का सबूत दिखाना अनिवार्य कर दिया जाए।

