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मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद ने कहा कि बंदूक संस्कृति के रहते मणिपुर में शांति असंभव

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इम्फाल —

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद ने रविवार को कहा कि राज्य में तब तक स्थायी शांति और विकास संभव नहीं है, जब तक वहां बंदूक संस्कृति का अस्तित्व बना हुआ है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, कांगपोकपी जिले में स्थित सिनाई कैंप का सुरक्षा बलों द्वारा संयुक्त अभियान के तहत नियंत्रण अपने हाथ में लिए जाने के बाद उन्होंने वहां का दौरा किया और यह बात कही।

सिनाई कैंप कुकी नेशनल आर्मी (KNA) और कुकी लिबरेशन आर्मी (KLA) का नामित शिविर है, जो ऑपरेशन के स्थगन (SoO) समझौते के दायरे में आते हैं। यह किसी भी मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा किसी SoO नामित शिविर का पहला दौरा है। मुख्यमंत्री के साथ हीरोइक विधानसभा क्षेत्र के विधायक और सरकारी प्रवक्ता थ. राधेश्याम भी मौजूद रहे।

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सुरक्षा बलों और कर्मियों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री खेमचंद ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की कोबरा इकाई के साहस और वीरता की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिविर को पूरी तरह नियंत्रण में लाने वाले सफल अभियान में इस इकाई ने अग्रणी भूमिका निभाई। साथ ही, उन्होंने सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि तलाशी अभियानों से आम नागरिक प्रभावित न हों। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल लोगों के जीवन और संपत्तियों की रक्षा के लिए तैनात हैं।

मुख्यमंत्री सचिवालय के बयान के अनुसार, इम्फाल पूर्वी जिले के सुनुलोक में मेइती समुदाय के तीन जलावन लकड़ी संग्राहकों की हत्या के बाद, सीआरपीएफ की कोबरा इकाई, मणिपुर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियान के तहत शिविर को हथियारों से मुक्त कराकर सीआरपीएफ के नियंत्रण में ले लिया गया। अभियान के दौरान शिविर में फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर पंजीकृत SoO काडर के रूप में रह रहे 17 व्यक्ति पाए गए। मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान में कहा गया है कि इस शिविर में लगभग 150 काडरों के रहने की बात थी।

मुख्यमंत्री ने पूरे शिविर परिसर का निरीक्षण किया और सीआरपीएफ तथा असम राइफल्स के अधिकारियों से अभियानों और क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र के स्थानीय ग्रामीणों और नागरिक समाज संगठनों (CSO) के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।

इस दौरे के दौरान सीआरपीएफ (मणिपुर एवं नागालैंड सेक्टर) के महानिरीक्षक होमकर अमोल विनुकांत, मणिपुर पुलिस के महानिरीक्षक कामेई अंगम रोमनस, मणिपुर पुलिस के डीआईजी एन. हेरोजीत मेइती, सीआरपीएफ के डीआईजी राजेश कुमार, असम राइफल्स के कर्नल राधा कृष्णन, कांगपोकपी के उपायुक्त तथा कांगपोकपी और इम्फाल पूर्व के पुलिस अधीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

भारत सरकार और मणिपुर सरकार के साथ कुकी आतंकवादियों का त्रिपक्षीय SoO समझौता 22 अगस्त 2008 को पहली बार हस्ताक्षर किया गया था। इसके तहत दो प्रमुख संगठनों — 17 समूहों वाले कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (KNO) और 8 समूहों वाले यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (UPF) — के कुल 25 संगठन शामिल हैं। इस समझौते का उद्देश्य शत्रुता को समाप्त करना था, जिसमें उग्रवादी समूहों ने किसी भी प्रकार की हिंसा को पूरी तरह रोकने पर सहमति दी थी। इन समूहों के काडर 14 नामित शिविरों में रखे जाते हैं।

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यह SoO समझौता मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के दौरान 4 सितंबर 2025 को एक वर्ष के लिए नवीनीकृत किया गया था। इस नवीनीकरण का राज्यभर के लोगों, विशेषकर मेइती समुदाय के सदस्यों द्वारा भारी विरोध किया गया था और समझौते को रद्द करने की मांग की गई थी। हालांकि, मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौउजम ने मीडिया को पुष्टि की थी कि 4 सितंबर 2026 को समाप्त होने के बाद से यह SoO समझौता आगे बढ़ाया या नवीनीकृत नहीं किया गया है।

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