लखनऊ —
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में एक ही नाम के कई बार दर्ज होने की गंभीर गड़बड़ी के मामले में नौ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और बर्खास्तगी के नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप Rinwa के अनुसार, समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा 15 अक्टूबर को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची में विसंगतियों का मुद्दा उठाए जाने के बाद निर्वाचन आयोग ने इसका संज्ञान लिया। इसके बाद आजमगढ़ के जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) को विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए गए थे।
जांच में सामने आया कि आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में ‘विकास यादव’ नाम शुरुआती तौर पर पिता के नाम, आयु और पते की समान जानकारी के साथ 13 बार दर्ज किया गया था, जिनमें से दो प्रविष्टियों को बाद में हटा दिया गया था। आगे की गहन जांच में पता चला कि शेष 11 प्रविष्टियां विभिन्न गांवों में रहने वाले 11 अलग-अलग व्यक्तियों से जुड़ी थीं, लेकिन उनके पिता का नाम, पता और जन्मतिथि एक जैसी ही दर्ज कर दी गई थी। इसके अलावा, गोरखपुर जिले की चौरी-चौरा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में भी समान जन्मतिथि के साथ एक विकास यादव के नाम का पंजीकरण पाया गया।
इस प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए निर्वाचन आयोग ने तब के चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO), दो सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (AEROs), पांच बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) और एक कंप्यूटर सहायक को दोषी माना है। जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि दोषी पाए गए कंप्यूटर सहायक और BLOs को तुरंत मतदाता सूची के कार्यों से हटाया जाए और उनकी सेवाएं समाप्त करने के नोटिस जारी किए जाएं। साथ ही, तत्कालीन ERO और दो AEROs के खिलाफ पर्यवेक्षण में लापरवाही बरतने के आरोप में विभागीय कार्यवाही के लिए चार्जशीट जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
निर्वाचन आयोग ने आजमगढ़ जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की गहन जांच कराने का आदेश दिया है और एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा वास्तविक मतदाता को छोड़कर अन्य 10 विकास यादवों से विवरण में सुधार के लिए फॉर्म-8 भरवाया गया है।
इससे पहले उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में भी मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ी का ऐसा ही मामला सामने आ चुका है। अधिकारियों के संकेत के अनुसार, विस्तृत जांच पूरी होने के बाद आयोग दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश भी दे सकता है, जैसा कि पीलीभीत सदर के मामले में किया गया था।

