नई दिल्ली — भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूचियों में विसंगतियों की पहचान करने में प्रयुक्त सॉफ्टवेयर के विवरण का खुलासा करने से इनकार कर दिया है। निर्वाचन आयोग ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए यह जानकारी देने से मना किया है। यह जवाब 16 अक्टूबर को तेलंगाना के करीमनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एम.ए. मुजीब अय्यूब द्वारा दाखिल आरटीआई आवेदन के जवाब में दिया गया था।
निर्वाचन आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए कहा कि इसमें वाणिज्यिक विश्वास, व्यापार रहस्य (ट्रेड सीक्रेट्स) और बौद्धिक संपदा शामिल हैं। आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर विकसित या खरीदा नहीं गया है। साथ ही, आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी मतदाता के नाम को शामिल करने या हटाने का निर्णय संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर लिया जाता है।
इस प्रक्रिया के व्यापक प्रशासनिक और कानूनी संदर्भ में, विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत अब तक देश भर में 130 मिलियन (13 करोड़) नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा चुके हैं, जिसके चलते आयोग को आलोचनाओं और अनियमितताओं के आरोपों का सामना करना पड़ा है। इसके अतिरिक्त, आरटीआई के तहत यह पूछे जाने पर कि चिन्हित विसंगतियों की समीक्षा कौन करता है, निर्वाचन आयोग ने धारा 8(1)(g) का हवाला दिया। आयोग का कहना था कि इस जानकारी के खुलासे से किसी के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है या गोपनीय कानून प्रवर्तन स्रोतों का खुलासा हो सकता है।
इस बीच, पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ.पी. रावत ने सुझाव दिया है कि आवेदक को इस मामले में सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष अपील दाखिल करनी चाहिए।
दूसरी ओर, द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयुक्तों एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 बार लिखित असहमति और आपत्तियां दर्ज कराई थीं तथा मंत्रिमंडल सचिव को पत्र लिखा था, जिसके बाद चुनाव अधिकारियों ने पाया कि उनकी ईसीआई सॉफ्टवेयर तक पहुंच सीमित कर दी गई थी। इस पर निर्वाचन आयोग ने कहा कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां विचार-विमर्श की एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उसके सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म कड़े डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होते हैं। इसके अलावा, फरवरी में चुनाव आयोग के आईटी डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया था कि पश्चिम बंगाल एसआईआर में कुछ समस्याओं की जड़ें आयोग के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर नेटवर्क (ERONET) पोर्टल में हैं।

