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अमेरिका ने भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी से किया इनकार, संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

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वाशिंगटन —

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ग्यानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने इन विरोध प्रदर्शनों को भारत का आंतरिक राजनीतिक मामला करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (संरा) के मानवाधिकार विशेषज्ञों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी दलों और छात्र संगठनों द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी पुनरीक्षण प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इस पुनरीक्षण का बचाव करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य फर्जी प्रविष्टियों, मृत, स्थानांतरित और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना है, साथ ही इसमें अपील करने का प्रावधान भी है।

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इस बीच, 20 से अधिक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने मंगलवार को भारत में हालिया प्रदर्शनों से निपटने के तरीके की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। संरा विशेषज्ञों का आरोप है कि अधिकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया, लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया और सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगाए।

इस अंतरराष्ट्रीय आलोचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संरा विशेषज्ञों के इस कदम पर सवाल उठाया और उनके पद की विश्वसनीयता पर संदेह जताया।

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजनयिक बरखा ताम्रकार ने कहा कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या देशों को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। भारत पहले भी अपनी प्रदर्शन-नियंत्रण प्रणाली पर होने वाली अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं को खारिज करते हुए इसे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बता चुका है।

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