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भारत

दिल्ली में इंटरनेट प्रतिबंध और सुरक्षा इंतजामों पर उमर अब्दुल्ला ने कसा तंज

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नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले किए गए कड़े सुरक्षा इंतजामों और इंटरनेट प्रतिबंधों पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तीखा तंज कसा है। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘कश्मीर मॉडल’ को अब दिल्ली में लागू कर दिया गया है।

राष्ट्रीय राजधानी के सेंट्रल दिल्ली इलाके में शुक्रवार रात 10 बजे से 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद करने का आदेश दिया गया है। इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर लिखा कि कश्मीर मॉडल को दिल्ली में निर्यात कर दिया गया है। नई दिल्ली में आपका स्वागत है, जो नए जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर गढ़ा गया है। उन्होंने यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर के उस लंबे इतिहास के संदर्भ में की जहां सुरक्षा कारणों, विशेषकर घाटी में, अक्सर इंटरनेट बंद किए जाते रहे हैं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इन दिनों इंडिया ब्लॉक के नेताओं के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव लोकतंत्र की नींव होते हैं और यदि चुनाव ही निष्पक्ष नहीं होंगे, तो फिर वह लोकतंत्र कैसे कहलाएगा।

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इस दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने मांग की कि केवल भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए मतदाता सूचियों से नाम हटाने की प्रक्रिया को पलटा जाए, पुरानी सूचियों को बहाल किया जाए और पूरी चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनाव आयोग से सवाल पूछे जाते हैं, तो उनके जवाब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की तरफ से दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच ऐसा संबंध है कि भाजपा खुद चुनाव आयोग की ओर से बोल रही है। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद उन्होंने याद दिलाया कि उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया के दौरान ही चुनाव आयोग के आचरण पर सवाल खड़े कर दिए थे।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जम्मू-कश्मीर में परिसीमन क्यों कराया गया था, और जवाब दिया कि यह केवल भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि बढ़ाई गई सात सीटों में से छह सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस तभी से यह कह रही है कि चुनाव आयोग जनता के जनादेश को विकृत करने के लिए भाजपा के साथ मिला हुआ है, और वही पैटर्न अब आगे भी जारी है।

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